आम बजट तय समय पर पेश होगा ये देश का बजट है किसी एक राज्य का बजट नही : चुनाव आयोग

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने बुधवार को पांच राज्‍यों के विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित कीं। वहीं विपक्ष ने इसको लेकर भी बखेड़ा खड़ा कर दिया। विपक्ष ने कहा कि चुनाव से पहले बजट पेश नहीं किया जा सकता। ऐसा करना गलत है।

New Delhi: Chief Election Commissioner, Nasim Zaidi  announces the schedule for assembly polls in five states, including West Bengal and Tamil Nadu at a press conference, in New Delhi on Friday. PTI Photo by Vijay Verma (PTI3_4_2016_000110A)

New Delhi: Chief Election Commissioner, Nasim Zaidi announces the schedule for assembly polls in five states, including West Bengal and Tamil Nadu at a press conference, in New Delhi on Friday. PTI Photo by Vijay Verma (PTI3_4_2016_000110A)

चुनाव से पहले बजट को लेकर विपक्ष का हमला

चुनाव आयोग ने विपक्ष के इस दावे को धता बताते हुए कहा कि चुनाव से पहले बजट पेश करने से कुछ नहीं होगा। सूत्रों के हवाले से खबर है कि इलेक्शन कमीशन बजट की तारीख को आगे बढ़ाने पर विचार नहीं कर रहा।

विपक्षी दलों ने खटखटाया था चुनाव आयोग का दरवाजा

संसद का बजट सत्र शुरु होने में 25 दिन का वक्त बाकी है, लेकिन उसके पहले ही सत्ता और विपक्ष के बीच तकरार खुल कर देखने को मिल रहा है। इसी सिलसिले में गुरुवार को कांग्रेस समेत विभिन्न विपक्षी दल ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया था।

विपक्ष ने लगाई थी गुहार

विपक्ष ने गुहार लगाई थी कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बजट की तारीख एक फरवरी से आगे बढ़ाने के लिए चुनाव आयोग पहल करे। हालांकि आयोग पहले ही साफ कर चुका है कि इस बारे में प्रतिवेदन उसे मिल चुके हैं और वो उस पर विचार करेगा।

तारीख तय करने के मामले में राष्ट्रपति की बात ही अंतिम मानी जाएगी

लोकसभा चलाने के तौर-तरीकों में नियम संख्या 204 में साफ तौर पर लिखा है कि राष्ट्रपति जिस तारीख को बजट पेश करने का निर्देश देंगे, उसी तारीख को बजट पेश होगा। दूसरी ओऱ संविधान की धारा 112 के तहत भी कहा गया है कि राष्ट्रपति की मंजूरी से ही सरकार खर्चों और आमदनी का सालाना लेखा-जोखा यानी बजट पेश करेगी। इन दोनों के आधार पर कहा जा सकता है कि बजट की तारीख तय करने के मामले में राष्ट्रपति की बात ही अंतिम मानी जाएगी।

बजट पेश करने को लेकर कोई कानून या नियम नहीं

फिलहाल, ध्यान देने की बात ये है कि बजट तैयार करना और पेश करना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है, लेकिन ऐसा कोई कानून या नियम नहीं जो कहता है तो उसे फरवरी के आखिरी कार्यदिवस को ही पेश करना है। यह सिर्फ परम्परा है।

कार्यक्रम में फेरबदल नहीं करेगी केंद्र सरकार !

सरकार के लिए ये भी जरुरी है कि 31 मार्च तक खर्चों से जुड़े बजट के कुछ हिस्सों को संसद से मंजूर करा ले, ताकि एक अप्रैल से अपने कर्मचारियो को वेतन देने के साथ तमाम दूसरे खर्चों के लिए पैसा उपलब्ध हो। साथ ही नियम ये भी कहता है कि टैक्स प्रस्तावों से जुड़ा फाइनेंस बिल हर हालत में पेश की गई तारीख से 75 दिनों के भीतर संसद से पारित करना होगा। सरकार के रुख से साफ लग रहा है कि वो विपक्ष के मांगों के हिसाब से बजट कार्यक्रम में फेरबदल नहीं करेगी।

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